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'जंगल कभी मनुष्य नहीं बना पायेगा, यह प्राकृतिक तरह से ही बन सकता है'

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शेखर पाठक की शोधपरख पुस्तक 'हरी भरी उम्मीद' पर पटना में गोष्ठी का आयोजन किया गया.
जंगल मरते जा रहे हैं, जलते जा रहे हैं। ऐसे में पटना पुस्तक मेले में शेखर पाठक की शोधपरख पुस्तक "हरी भरी उम्मीद" पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पर्यावरणविद रंजीव व गाँधीवादी शोधकर्ता ग़ालिब ने शिरक़त की।

रंजीव ने बताया कि रासायनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता को घोर क्षति पहुँची है। जंगल कभी मनुष्य नहीं बना पायेगा, यह प्राकृतिक तरह से ही बन सकता है। जब मनुष्य मिट्टी ही बर्बाद कर देगा, तो जंगल नहीं बचेगा।

ग़ालिब ने कहा कि मैंने उत्तराखंड की बहुत यात्रा की है। अपनी यात्रा में मैंने यह जाना कि चिपको आन्दोलन देश का न सिर्फ पर्यावरण का बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और जातीय आंदोलन है।

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बिहार के संदर्भ में ग़ालिब ने चिन्ता जतायी कि पानी की किल्लत से मनुष्य का जीवन ख़ास प्रभावित हुआ है। पशुओं के लिए भी पानी नहीं बचा। रंजीव ने इस पर कहा कि बिहार का इकोनॉमिक कारणों की वजह से बहुत शोषण हुआ है। बिहार बासमती का प्रदेश है। चावल और खेती बिहार की एग्रीकल्चरल ही नहीं, बल्कि पॉलिटिकल इकोनॉमी भी बन गए है।


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विकास के नाम पर बिहार के जनजातीय जीवन हनन हुआ है। जहाँ 600 नदियाँ  बिहार में उतरती थी, अब 250 भी नहीं हैं बिहार में पिछले दिनों आयी बाढ़ इस बात का सबूत है कि विकास की क़दम ताल पर्यावरण से नहीं है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन रंगकर्मी अनीश अंकुर ने किया व धन्यवाद ज्ञापन वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल ने किया।