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'गगन गिल की रचनाओं में अवसाद है, पीड़ा और दुख को लेकर विमर्श है'

गगन गिल की रचनाओं में
गगन गिल समय-समय पर अपने एकांत में चली जाती हैं और वहाँ से कुछ विशिष्ट लेकर लौटती हैं.
वाणी प्रकाशन द्वारा आयोजित ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर में सुपरिचित रचनाकार गगन गिल की तीन नयी पुस्तकों 'इत्यादि','मैं जब तक आयी बाहर' और 'देह की मुँडेर पर' का लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ लेखक हरीश त्रिवेदी, वरिष्ठ रचनाकार प्रयाग शुक्ल, वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल एवं रचनाकार शिक्षाविद सुकृता पॉल कुमार ने गगन गिल की रचनाधर्मिता पर अपने वक्तव्य दिये।

सुकृता पॉल कुमार के अनुसार गगन गिल की रचनाओं में यात्रा देखने को मिलेगी। यहाँ शब्द अपने आप को ख़त्म करते जाते हैं और बच जाता है सिर्फ़ अनुभव। उनका मानना है कि कविता अनुभव को जन्म देने की कला है और गगन गिल ने अपनी कविताओं में वह बखूबी किया है।

प्रयाग शुक्ल ने कहा कि गगन को पढ़ते समय उनके स्वर की ओर ध्यान जाता है। हर लेखक अपनी रचनाओं में शब्दों को नहीं शब्दातीतों को ही ढूँढता हुआ प्रतीत होता है। प्रयाग शुक्ल ने आगे कहा कि आज के समय में आपको अगर किसी तक अपनी बात आगे पहुँचानी है तो आपको जोर से कहना होगा। गगन की रचनाओं में अवसाद है, पीड़ा और दुख को लेकर विमर्श है, लेकिन ज्योतिरेखा की एक चाह भी है। गगन गिल की रचनायें एक घेरा बनाती हैं और पाठक को उस स्थान पर ले जाती हैं जहाँ वह जाना चाहता है। इस हिंसक समय में उनकी कविताएँ संवेदनशील व्यक्ति को विचलित करती हैं।

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मंगलेश डबराल ने गगन गिल की कविताओं को स्त्री दृष्टि की कविताएँ बताया। उनके अनुसार रचनाओं में एक प्रतिरोध भी देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि गगन गिल की कविताएँ उपस्थिति और अनुपस्थिति के बीच की कविताएँ हैं। उनकी कविताओं में घाव है आर्तनाद है परंतु रक्तपात नहीं है।

हरीश त्रिवेदी के अनुसार गगन गिल समय-समय पर अपने एकांत में चली जाती हैं और वहाँ से कुछ विशिष्ट लेकर लौटती हैं। 'देह की मुंडेर' शीर्षक अपने आप में एक वैश्विक दृष्टि की ओर संकेत है। गगन की लेखनी काव्यात्मक है, पर भावुक नहीं है। उनका स्वर निर्भीक है। 'इत्यादि' साधारण स्मृति आख्यान से अलग है। यह इनकी आध्यात्मिक आत्मकथा है।

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वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि ये बौद्धिक स्वर में हलचल पैदा करने वाले शब्द हैं। गगन गिल, निर्मल वर्मा के शब्द समयातीत हैं और वाणी प्रकाशन उनके लिए गौरवान्वित हैं।

गगन गिल ने कार्यक्रम में अपनी रचनाओं का पाठ किया एवं कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रोताओं एवं वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन वाणी प्रकाशन की प्रधान संपादक रचनाकार रश्मि भारद्वाज ने किया।