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कुमार विश्वास ने कहा - 'किताब अपने आप में मुश्किल चीज है'

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कुमार विश्वास ने अपनी जीवन के कुछ पहलुओं, यात्राओं को कविताओं के माध्यम से साझा किया है.
कुमार विश्वास कविताओं की दुनिया का जाना-माना नाम है। वो जहां जाते हैं लोग उनको सुनने को आतुर रहते हैं। ऐसा ही कुछ विश्व पुस्तक मेले में देखने को मिला। विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन के स्टाॅल जलसाघर में कवि कुमार विश्वास ने अपनी किताब 'फिर मेरी याद' पर बातचीत की।

'फिर मेरी याद' कुमार विश्वास का कविता संग्रह है जो उनकी पहली किताब के प्रकाशन के बारह साल बाद प्रकाशित हुआ। इसमें उन्होंने अपने जीवन के कुछ पहलुओं, यात्राओं को कविताओं के माध्यम से साझा किया है। संग्रह में गीत, कविता, मुक्तक, कला और अशआर सबकी बहार है। नामवर सिंह ने किताब के बारे में लिखा था, "कुमार विश्वास ने अपने नाम को और विश्वास शब्द को सार्थक किया है। नए लेखकों और कवियों के लिए उनके प्रयासों में भी उन्हें बड़ी कामयाबी मिली है।"

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कुमार विश्वास ने राजकमल प्रकाशन के मंच से कहा कि किताब अपने आप में मुश्किल चीज है। पाठकों की ज़बरदस्त भीड़ के बीच उन्होंने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया।

अपनी आलोचना की किताब 'कठिन का अखाड़ेबाज़ और अन्य निबंध' पर बात करते हुए व्योमेश शुक्ल ने कहा कि वाद-विवाद और आलोचना की संस्कृति को ये निजाम दबाना चाहता है।

नई कविताओं की किताबों का लोकार्पण जलसाघर के मंच से किया गया। इसमें व्योमेश शुक्ल की 'काजल लगाना भूलना', प्रियदर्शन की 'यह जो काया की माया है', अरुण देव की पुस्तक 'उत्तर पैगम्बर' शामिल है।