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'हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति' का लोकार्पण एवं परिचर्चा

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लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में 1 फरवरी को किया जायेगा.
अभय दुबे की नई पुस्तक 'हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति' का लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में 1 फरवरी को किया जायेगा। यह कार्यक्रम शाम छह बजे आयोजित होगा।

इस कार्यक्रम में दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स से जुड़े समाजशास्त्री सतीश देशपांडे, मैगसेसे पुरस्कार विजेता और एनडीटीवी के प्रबंध सम्पादक रवीश कुमार, राज्य सभा सदस्य और संघ विचारक राकेश सिन्हा, गाँधीवादी चिंतक और लेखक सोपान जोशी और इतिहासकार अपर्णा वैदिक वक्ता होंगे।

हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति पुस्तक के बारे में
पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारात्मक राजनीति हाशिये से निकल कर सार्वजनिक जीवन पर हावी होती जा रही है। दूसरी तरफ़, आज़ादी के बाद से ही उसकी आलोचना करने वाला वामपंथी, सेकुलर और उदारतावादी विमर्श केंद्र से हाशिये की तरफ़ खिसकता जा रहा है। इस परिवर्तन का कारण क्या है? यह पुस्तक विमर्श के धरातल पर इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करती है। विमर्श-नवीसी (डिस्कोर्स मैपिंग) की शैली में लिखी गई इस रचना का मक़सद हिंदू-एकता की परियोजना और संघ परिवार के विकास-क्रम का ब्योरा देते हुए बहुसंख्यकवाद विरोधी विमर्श के भीतर चलने वाली ज्ञान की राजनीति को सामने लाना है। इसी के साथ यह पुस्तक इस विमर्श के उस हिस्से को मंचस्थ और मुखर भी करना चाहती है जिसे ज्ञान की इस राजनीति के दबाव में पिछले चालीस साल से कमोबेश पृष्ठभूमि में रखा गया है।

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किताब यहां उपलब्ध है : https://amzn.to/2E1BIjv

लेखक अभय कुमार दुबे के बारे में
अभय कुमार विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) में फेलो और भारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक हैं। पिछले दस साल से हिंदी-रचनाशीलता और आधुनिक विचारों की अन्योन्यक्रिया का अध्ययन कर रहे हैं। समाज-विज्ञान को हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में लाने की परियोजना के तहत पंद्रह ग्रंथों का सम्पादन और प्रस्तुति कर चुके हैं। कई विख्यात विद्वानों की रचनाओं के अनुवाद किया है।