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'मैं कहा करती थी कि कांग्रेस गेटकीपर की पार्टी है पर अब ऐसा ही कुछ भाजपा के साथ हो रहा है' -सबा नक़वी

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सबा की पुस्तक ‘भगवा का राजनीतिक पक्ष : वाजपेयी से मोदी तक’ पर चर्चा हुई.
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े और पुराने किताबी गढ़ 'दरियागंज' की विस्मृत साहित्यिक शामों को विचारों की ऊष्मा से स्पंदित करने के लिए वाणी प्रकाशन द्वारा एक विचार श्रृंखला 'दरियागंज की किताबी शाम' की शुरुआत की गयी है। इसमें विमर्श की ऊष्मा के साथ शामिल होगी गर्म चाय की चुस्कियाँ, कागज़ की ख़ुशबू और पुरानी दिल्ली का अपना ख़ास पारंपरिक फ़्लेवर। आज इस श्रृंखला की चौथी कड़ी का आयोजन किया गया।

दरियागंज की किताबी शाम-4 में इस बार परिचर्चा का विषय था –‘भगवा का राजनीतिक पक्ष : वाजपेयी से मोदी तक’ इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार सबा नक़वी से संवाद किया युवा रचनाकार लव कनोई ने। ज्ञात हो कि सबा नक़वी की बहुचर्चित अंग्रेज़ी पुस्तक ‘शेड्स ऑफ़ सैफ़रन: वाजपेयी टू मोदी’ का हिन्दी अनुवाद ‘भगवा का राजनीतिक पक्ष: वाजपेयी से मोदी तक’ इसी वर्ष 2019 के मई माह में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है।

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युवा रचनाकार लव कनोई ने परिचर्चा की शुरुआत करते हुए सबा नक़वी से उनकी किताब के बनने की प्रक्रिया पर सवाल किए।

सबा नक़वी ने कहा कि यह किताब नहीं पत्रकारिता है। कमर्शियली यह मेरी सबसे महत्वपूर्ण किताब है। एक एजेंट ने मेरे पीछे पड़कर यह किताब लिखवा ली। फिर लिखते हुए स्मृतियों में जाते हुए मज़ा आने लगा। सबा ने कहा कि जब मैं अपनी लिखी रिपोर्ट देखती हूँ तो यह तो तसल्ली होती कि मैं अच्छा लिखती हूँ। मैं अपनी किताब को हिन्दी में इतनी ख़ूबसूरती से पेश किए जाने के लिए वाणी प्रकाशन की शुक्रगुज़ार हूँ। मैं वाकई बहुत ख़ुश हूँ कि यह किताब हिंदी पाठकों तक पहुँचेगी।

भाषा सम्बन्धी अनुवाद के बाबत लव द्वारा सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि कई हिन्दी मुहावरों जैसे वाजपेयी जी की ख़ूबसूरत भाषा का अनुवाद नहीं किया जा सकता। नरेंद्र मोदी की हिन्दी अलग तरह की है। लव द्वारा सेक्युलिरिज़्म पर सबा के एक आर्टिकल का हवाला देते हुए पूछा कि क्या इस किताब के हिन्दी में आने पर धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों या देशज भाषा पर बात होगी? इस पर सबा का कहना था कि नया भारत अब इन मुद्दों और देशज शब्दों को अपनी भाषा और जीवनशैली में जगह देगा।

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सबा के अनुसार आज भाजपा की प्रकृति ख़ुद को बंद कर रखने की है पर पहले ऐसा नहीं था। खुल कर बातचीत होती थी। वह एक अलग ही दौर था। मैंने जिन संपादकों के साथ काम किया उनके साथ स्वतंत्रता थी। पर अब चीज़ें बदल गईं हैं इसलिए मैं अपनी स्तम्भकार की भूमिका में ख़ुश हूँ। आज सरकार से आम जनता को सूचनाएँ मिलनी बंद हो गयी है। अभी भी पत्रकार विशेष कार्ड के साथ अंदर जा सकते पर उनसे मिलेगा कौन? भाजपा की प्रकृति पहले से बदली है। पहले के आज़ाद ख़्याल और बुद्धिजीवी नेता वाजपेयी, अरुण जेटली, जसवंत सिंह आदि अब वहाँ नहीं हैं और प्रोटोकॉल बदल गया है।

हिन्दुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार संजय कबीर ने सोशल मीडिया की भूमिका के बारे में सबा से सवाल किए। इस प्रश्न के उत्तर में सबा ने कहा कि भाजपा अपने सैद्धांतिक कोड के साथ सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय है।

पत्रकार हंसराज के सवाल कि क्या सूचनाएँ सही से नहीं आ रहीं के उत्तर में सबा ने कहा कि क्या अब कोई एक्सल्युसिव ख़बर आपने देखी है।

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कांग्रेस और भाजपा पर सबा ने कहा कि कांग्रेस एक कमज़ोर और संगठनात्मक रूप से बहुत दुर्बल पार्टी है। वहाँ परिवारवाद भी बहुल है। इसके कई कारण है जैसे मंडल, मंदिर जिसे वह पहचान नहीं पाए। लोग अमीर हो गए और पार्टी कंगाल। पर भाजपा संगठन के तौर पर बहुत मज़बूत है। पर अफ़सोस है कि यहाँ भी अब व्यक्तिवाद आ गया है। मैं कहा करती थी कि कांग्रेस गेटकीपर की पार्टी है पर अब ऐसा ही कुछ भाजपा के साथ हो रहा। वैसे यह तारीफ़ की बात कि सबसे अच्छी गठबंधन सरकार भाजपा ने बनायी है। उसने ममता, नीतीश जैसों नेताओं के लिए ट्रेनिंग स्कूल की तरह भी काम किया है।

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सबा के अनुसार भाजपा में भी महिलाओं की सही भागेदारी नहीं है। सिर्फ़ उच्च पदों पर कुछ महिलाओं की स्थिति से स्त्रियों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी ने कहा कि यह किताब महिमामंडन नहीं बल्कि एक शोधपरक किताब है जिसमें हमने फ़ैक्ट्स और भाषा की शुद्धता पर बहुत ध्यान दिया है।

कार्यक्रम में रमेश कुमार, अंकुश कुमार, संजय कबीर, हंसराज, डॉ. भारती, अरुण कुमार, हिमांशु, शालीन आदि उपस्थित रहे।