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वाणी प्रकाशन के संग दरियागंज की किताबी शाम

दरियागंज की किताबी शाम
श्रृंखला की पहली कड़ी अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस से आरम्भ हो रही है.
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े और पुराने किताबी गढ़ 'दरियागंज' की विस्मृत साहित्यिक शामों को फिर से एक बार विचारों की ऊष्मा से स्पंदित करने के लिए वाणी प्रकाशन एक नयी विचार श्रृंखला 'दरियागंज की किताबी शामें' की शुरुआत कर रहा है। इसमें विमर्श की ऊष्मा के साथ शामिल होगी गर्म चाय की चुस्कियाँ, कागज़ की ख़ुशबू और पुरानी दिल्ली का अपना ख़ास पारंपरिक फ़्लेवर।

इस श्रृंखला की पहली कड़ी 8 मार्च, अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस से आरम्भ हो रही है। परिचर्चा का विषय है- जेंडर लेंस, उत्तर आधुनिक समय और उसके प्रश्न और इस विषय पर संवाद करेंगे-नीलिमा चौहान, प्रवीण कुमार, रजत रानी मीनू, उमाशंकर चौधरी।

कार्यक्रम का आयोजन वाणी प्रकाशन के कार्यालय में, डॉ. प्रेमचंद ‘महेश’ सभागार में शाम 5 बजे आयोजित होगा।

कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं..

नीलिमा चौहान :
नीलिमा पेशे से शिक्षिका हैं और फ़िलवक़्त दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सान्ध्य) में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं। वे एक माँ, बेटी, पत्नी, दोस्त और लेखिका जैसी बेहद व्यवस्थित भूमिकाओं में भी हैं। वे ख़ुद को अन्तर्मन की खोजी ज़्यादा मानती हैं। शब्द और चुप्पी की स्त्री-भाषा में जो कुछ अनकहा रह जाता है उसे ताड़ना और कह देना अपना असली काम समझती हैं। बाग़ी प्रेम-विवाहों के आख्यानों के सम्पादित संकलन के बाद अब ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’ आपके हाथों में है।

प्रवीण कुमार :
रुझान से इतिहास, अवधारणा और साहित्य के गम्भीर शोधार्थी डॉ. प्रवीण कुमार की आरंभिक शिक्षा बिहार के भोजपुर जिले में हुई फिर दिल्ली से ही माध्यमिक और उच्य-माध्यमिक करके हिन्दू कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय से तमाम डिग्रियाँ हासिल की। हिन्दी की पत्रिकाओं में इनके लेख और समीक्षाएँ विवाद एंव प्रशंसा के विषय रहे हैं। हँस, तद्भव और नयापथ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में छपी कहानियॉं ख़ूब चर्चित रही और पहला कहानी संग्रह ‘छबीला रंगबाज का शहर’ को डॉ. विजय मोहनसिंह स्मृति युवा कथा पुरस्कार और अमर-उजाला फ़ाउंडेशन का शब्द-सम्मान (प्रथम कृति के लिए -थाप सम्मान) प्राप्त हुआ। हाल ही में तद्भव में आई लम्बी कहानी 'एक राजा था जो सीताफल से डरता था' पर्याप्त चर्चा में है।

वाणी प्रकाशन के संग

उमाशंकर चौधरी : 
बिहार में जन्मे उमाशंकर चौधरी ने एम.ए., एम.फिल., पीएचडी दिल्ली विश्वविद्यालय से किया। उनके तीन कविता संग्रह हैं- 'कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे', 'वे तुमसे पूछेंगे डर का रंग', 'चूंकि सवाल कभी खत्म नहीं होते'। दो कहानी संग्रह हैं- 'अयोध्या बाबू सनक गए हैं', 'कट टू दिल्ली तथा अन्य कहानियाँ'। उमाशंकर ने एक उपन्यास 'अँधेरा कोना' भी लिखा है। उन्हें कविता के लिए अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन सम्मान और साहित्य अकादमी के युवा सम्मान, कहानी के लिए रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार प्राप्त है।

रजत रानी ‘मीनू’ :
रजत रानी ‘मीनू’ का जन्म उ.प्र. के शाहजहाँपुर जनपद के जौराभूड़ नामक गाँव में हुआ। उनकी शिक्षा एम.फिल., पीएच.डी. (हिन्दी दलित कथासाहित्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन); जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृतियां : हिन्दी दलित कविता, हिन्दी दलित कथा-साहित्य : अवधारणा और विधाएँ, हाशिए से बाहर, पिता भी तो होते है माँ, हम कौन हैं?, अस्मितामूलक विमर्श और हिन्दी साहित्य और अन्याय कोई परम्परा नहीं। पत्र-पत्रिकाएँ: हंस, कादम्बिनी, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, अन्यथा, अपेक्षा, बयान, वसुधा, अंगुत्तर, युद्धरत आम आदमी, इंडिया टुडे आदि पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ आत्मकथांश एवं समीक्षाएँ प्रकाशित। अनेक प्रकाशित हिन्दी ग्रन्थों में शोध-पत्र संकलित। नवें दशक की हिन्दी दलित कविता पुस्तक मध्य प्रदेश दलित साहित्य अकादमी, उज्जैन द्वारा पुरस्कृत।

वाणी प्रकाशन 55 वर्षों से 32 साहित्य की नवीनतम विधाओं से भी अधिक में, बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है। वाणी प्रकाशन ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गाँव, 2,800 क़स्बे, 54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।