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'किताब का महत्व कभी कम नहीं होगा' -अशोक महेश्वरी

अशोक महेश्वरी
पुस्तक मेले के अंतिम दिन कई किताबों का लोकर्पण भी हुआ.
दिल्ली के प्रगति मैदान में 9 दिन से चल रहे विश्व पुस्तक मेला का सम्पन हो गया। अंतिम दिन राजकमल प्रकाशन के स्टॉल जलसाघर में सुबह से ही पुस्तकप्रेमी अपने पसंद के पुस्तकों एवं लेखकों से मिलने भारी मात्रा में उपस्थित थे। डिजिटल ज़माने में भी किताबों के प्रति आज भी पाठकों की दीवानगी कम नहीं हुई है। राजकमल प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा कि किताब का महत्व कभी कम नहीं होगा।

इसबार के पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन, राधाकृष्ण प्रकाशन, लोकभारती प्रकाशन एवं सार्थक उपक्रम से विभिन्न–विभिन्न विधाओं की पुस्तकों की जबरदस्त मांग रही। क्लासिकल पुस्तकों में 'रागदरबारी', 'मैला आँचल', 'तमस', 'जूठन', 'चित्रलेखा', 'काशी का अस्सी' आदि किताबें खूब बिकीं। वहीं नई  किताबों में 'बेशरम', 'अपार ख़ुशी का घराना', 'सहेला रे', 'जल थल मल', 'जनता स्टोर', 'ग्यारहवीं A के लड़के', 'पाजी नज्में', 'मंटो', 'शेखर : एक जीवनी', 'कुछ इश्क किया कुछ काम किया', 'इश्क कोई न्यूज़ नहीं' आदि किताबों के लिये पाठकों का खास आकर्षण रहा। कुछ और किताबें जैसे ‘धूप की मुंडेर, अस्थि का फूल, पानी को सब याद था, कौन देश के वासी, साये में धूप, उर्वशी, तुम मेरी जान हो रजिया बी, भारत और उसके विरोधाभास, संस्कृति के चार अध्याय आदि के प्रति भी पाठकों की रूचि देखी गयी।

राजकमल प्रकाशन, राधाकृष्ण प्रकाशन

लेखक से मिलिए सत्र में राजकमल प्रकाशन के जलसाघर में लेखिका अरुंधती रॉय, तसलीमा नसरीन, अनुराधा बेनीवाल, अल्पना मिश्र, शाजी जमां, नवीन चौधरी, हिमांशु बाजपेयी, गीतांजली श्री सरीखे लेखक पुस्तक प्रेमियों से रूबरू हुए।

विश्व पुस्तक मेला

राजकमल प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अशोक महेश्वरी ने विश्व पुस्तक मेले पर अपने विचार रखते हुए कहा कि किताब तो किताब है और किताब ही रहेगी। किताब का महत्व कभी कम नहीं होगा। ई-बुक चलती किताब, ऑडियो बुक बोलती किताब, सिनेमा-बुक दिखती किताब, सब किताब फूल की पंखुरिया हैं। किताब इनका केंद्रीय तत्व है। मेले में 94 वर्ष की कृष्णा सोबती का उपन्यास आया तो, एकदम युवा अनघ शर्मा का पहला कहानी संग्रह और सुजाता का पहला उपन्यास आया। हाल ही में प्रकाशित ‘सहेला रे’ और ‘रेत समाधि’ को सराहते लोग मिले। अरुंधती रॉय और तसलीमा नसरीन की नई किताबों के लिए उभरती भीड़ का सैलाब भी हमने देखा। अशोक महेश्वरी ने कहा कि हमारे युवा पाठकों ने इसे साबित भी किया। बुज़ुर्ग कहीं बैठे थकान उतारते नज़र आए तो युवा चारों ओर छाए रहे, दौड़ते, किताबें ढूंढ़ते, दोस्तों से मिलते, एक दूसरे को किताबों के बारे में सलाह देते। नई किताबों की सुंदर प्रस्तुति और आकर्षक कवर डिजाईन को एक दूसरे को दिखाते, प्रफुल्लित पाठक। मेला इसी का नाम है।

विश्व पुस्तक मेला 2019

लेखिका सुजाता का कहानी संग्रह ‘एक बटा दो’, ‘आलोचना त्रैमासिक’, संजीव कुमार की ‘हिंदी कहानी की इक्कीसवी सदी’ एवं लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित रेनू अंशुल की कहानी संग्रह ‘कहना है कुछ’ का लोकार्पण भी हुआ।

~समय पत्रिका.