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92 की उम्र और नामवर की बैठकी

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इस अवसर पर नामवर जी की आगामी चार पुस्तकों की घोषणा की गई.
समकालीन हिंदी आलोचना को नई ऊंचाइयां देने वाले सुप्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह के 92वें  जन्मदिन के अवसर पर राजकमल प्रकाशन द्वारा 'नामवर संग बैठकी'  सेमिनार हॉल, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, लोधी रोड में किया गया. इस गोष्ठी में नामवर सिंह के साथ साथ साहित्य जगत के प्रमुख साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, काशीनाथ सिंह, पुरुषोतम अग्रवाल, गोपेश्वर सिंह, संजीव कुमार शामिल हुए.

इस शुभ अवसर पर राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक अशोक माहेश्वरी ने स्वागत भाषण में कहा- “नामवर जी राजकमल परिवार के मुखिया हैं, और हमें उनका 92वां जन्मदिन मनाते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है. हम नामवर जी की अच्छी सेहत की कामना करते हैं.’’ इसी मौके पर उन्होंने नामवर जी की आगामी 4 पुस्तकों की भी घोषणा की.

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‘रामविलास शर्मा’, ‘छायावाद- प्रसाद, निराला, महादेवी और पन्त’, ‘द्वाभा’ और ‘आलोचना अनुक्रमणिका’ इन चार आगामी पुस्तकों की घोषणा इस आयोजन में आज की गयी है. जिनके सम्पादक डॉ. नीलम सिंह, विजय प्रकाश सिंह, ज्ञानेंद्र कुमार सन्तोष और शैलेश कुमार मटियानी ने किया है. इस मौके पर इन किताबों की एक झलक भी दिखलाई गयी.

कार्यक्रम में नामवर सिंह ने साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा- “आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद हिन्दी के सबसे बड़े आलोचक रामविलास शर्मा हैं. रामविलास शर्मा कट्टरपंथी प्रगतिशील आलोचक थे. उदारवादी प्रगतिशीलों और कट्टरपंथी प्रगतिशीलों में बहस चलती रहती थी. बाद में रामविलास जी ने वेदों पर भी काम किया. मुझे आगरा में काम करते हुए रामविलास जी को जानने का मौक़ा मिला था, इसलिए मैंने उन पर यह काम किया है.”

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हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक और नामवर सिंह के छोटे भाई काशीनाथ सिंह ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा- “नामवर जी के स्वास्थ्य और लम्बी उम्र का पहला राज़ है- उनका पढ़ना और लिखना. जब तक वे पढ़ सकते हैं, तब तक वे स्वस्थ रहेंगे. दूसरा बड़ा राज़ है- विरोध होते रहना. विरोध से वे ताकत पाते हैं. उन्हें लोकप्रियता पसंद है. लोक जिह्वा पर बने रहना पसंद है. यह केवल अध्यापन करते हुए संभव नहीं था. आलोचकों में भी ऐसी लोकप्रियता किसी को नहीं मिली जैसी नामवर जी को मिली है.”

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लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी ने उन्हें “अज्ञेय के बाद हिन्दी का सबसे बड़ा स्टेट्समैन कहा.” और पुरुषोत्तम अग्रवाल ने हिन्दी साहित्य और आलोचना के बड़े नाम के रूप में नामवर जी को भाषणों में एकदम अलग व्यक्तित्व वाला और कक्षा में बिलकुल अलग व्यक्तित्व बताया. विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनेक संस्मरण भी उद्धृत किये.

लेखक गोपेश्वर सिंह ने कहा कि नामवर सिंह ने अपने दौर में देश का सर्वोच्च हिन्दी विभाग जेएनयु में बनवाया, हमने और हमारी पीढ़ी ने नामवर जी के व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है.