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'रज़ा पुस्तक माला' के तहत 12 पुस्तकों का लोकार्पण

रज़ा फाउंडेशन और राजकमल प्रकाशन 'रज़ा पुस्तक माला' सीरिज लेकर आया है.
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विश्व पुस्तक मेले के तीसरे दिन रज़ा फाउंडेशन के 'रज़ा पुस्तक माला' के पहले 12 पुस्तकों के सैट का लोकार्पण कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी, पत्रकार ओम थानवी, अपूर्वानन्द, सोपान जोशी, राजीव रंजन गिरि और राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी द्वारा किया गया। राजकमल प्रकाशन द्वारा इन पुस्तकों का हिंदी में प्रकाशन किया गया है। लोकार्पण के बाद ओम थानवी, अपूर्वानन्द, सोपान जोशी और राजीव रंजन गिरि ने ‘आज गांधी’ विषय पर परिचर्चा की और साथ ही डॉ. सादिक, मृत्युंजय और पीयूष दईया ने प्रकाशित पुस्तकों से अंश पाठ किया।

इस मौके पर कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा,'इस पुस्तक माला में दो किताबें प्रार्थना प्रवचन खंड 1 और 2 और दूसरी किताब गांधी की मेजबानी गाँधी जी पर आधारित हैं। चित्रकार सैयद हैदर रज़ा अथक हिन्दी प्रेमी थे और उनकी इच्छा के अनुरूप यह पुस्तकमाला शुरू की जा रही है।' उन्होंने आगे कहा कि सैयद हैदर रज़ा पर महात्मा गाँधी की गहरी छाप थी। वे गाँधी से पहली बार 8 वर्ष में मिले थे, जब बंटवारा हुआ तो सैयद हैदर रज़ा ने पाकिस्तान न जाने का फैसला किया। उन्हें लगा वे अगर ऐसा करेंगे तो गाँधी जी के साथ विश्वासघात होगा।'

'रज़ा पुस्तक माला' की किताबें जो लोकार्पित हुई उनमें ‘धूल की जगह’, ‘मुक्तिबोध के उद्धरण’, ’टेबल लेम्प’, ’खुद से कई सवाल’, ’आवाज़ में झरकर’, ’परस्पर’, ‘अंत और आरम्भ’, ‘प्रार्थना प्रवचन’ खंड 1 और 2 और ‘गाँधी की मेजबानी’।

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रज़ा फाउंडेशन और राजकमल प्रकाशन 'रज़ा पुस्तक माला' सीरिज लेकर आया है। यह पुस्तक माला प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की स्मृति में रज़ा फाउंडेशन के सहयोग से प्रकाशित गयी हैं। यह हिन्दी प्रकाशन और साहित्य जगत की अनूठी घटना है। पुस्तक माला के पहले सैट में 24 पुस्तकें एक साथ प्रकाशित की गयी हैं जो अपने आप में रिकॉर्ड है। इनमें ग़ालिब, महात्मा गांधी, मुक्तिबोध से लेकर सभ्यता-समीक्षा, कई बिसरा दी गयी पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन, युवा कवियों के पहले कविता-संग्रह, बुद्धिजीवियों से संवाद, बांग्ला-मराठी से अनुवाद, कला-आलोचना आदि शामिल हैं।

कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रज़ा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी। रज़ा की एक चिन्ता यह भी थी कि हिन्दी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है। विशेषतः कलाओं और विचार आदि को ले कर। 2016 में साढ़े चौरानवें वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रज़ा फाउंडेशन के प्रबन्ध न्यासी कवि-आलोचक-कलाविद अशोक वाजपेयी ने रज़ा की इच्छा का सम्मान करते हुए हिन्दी में कुछ नये क़िस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल 'रज़ा पुस्तक माला' के रूप की है।


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