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विश्व पुस्तक मेला : ग़ज़ल और कहानियों की बात

दिल्ली के किताब मेले में ‘यादों के आईने में’ और 'स्याही में सुर्खाब के पंख' पर चर्चा हुई.
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राजधानी में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के चौथे दिन राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पे उज़ैर ई. रहमान की किताब ‘यादों के आईने में’ पर आरजे सायमा ने लेखक से बात की. साथ ही पुस्तक से कुछ गजलों और नज्मों से अपनी मधुर आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध भी किया. दूसरे कार्यक्रम में अल्पना मिश्र ने अपनी किताब ‘स्याही में सुर्खाब के पंख’ से अंशपाठ किया.

‘यादों के आईने में’ उज़ैर ई. रहमान की गजल और नज़्म का संकलन है. उनकी लेखनी तजरबेकार दिल-दिमाग की अभिव्यक्तियाँ हैं. सँभली हुई ज़बान में दिल की अनेक गहराइयों से निकलती ये गज़लें कभी पढ़ने वालों को माज़ी में ले जाती हैं, कभी प्यार में मिली उदासियों को याद करने पर मजबूर करती हैं, कभी साथ रहनेवाले लोगों और ज़माने के बारे में, उनसे हमारे रिश्तों के बारे में सोचने को उकसाती हैं और कभी सियासत की सख्तदिली की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं.

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'स्याही में सुर्खाब के पंख' अल्पना मिश्र की कहानियों का संग्रह है. इस संग्रह में शामिल कहानियां हैं- 'स्याही में सुर्खाब के पंख', 'कत्थई नीली धारियों वाली कमीज', 'चीन्हा-अनचीन्हा', 'सुनयना! तेरे नैन बड़े बेचैन', 'राग-विराग', 'इन दिनों' और 'नीड़'.

अल्पना मिश्र की कथा-क्षमता विवरण-बहुलता में वास्तविकता के और-और करीब जाने की कोशिश में दिखाई देती है, जिसमें वे एक कुशल शिल्पी की तरह सफल होती हैं.


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