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विवेक अग्रवाल की पुस्तक ‘बॉम्बे बार’ का लोकार्पण

विवेक की किताब मुम्बई की बारबालाओं की जिन्दगी की अनकही दास्तान को तफसील से बयान करती है.
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विश्व पुस्तक मेले के 8वें दिन राजकमल प्रकाशन स्टॉल पर बॉम्बे की बारबालाओं की जिंदगी को वास्तविक ढंग से सामने लाती विवेक अग्रवाल की  किताब ‘बॉम्बे बार’ का लोकार्पण सत्यनारायण जटिया और अशोक माहेश्वरी द्वारा हुआ. विवेक अग्रवाल की यह पुस्तक बारबालाओं के समाज को समझने की एक अलग खिड़की खोल सकती है. इस पुस्तक पर लेखक से विनीत कुमार ने विस्तार से बात की.

विवेक अग्रवाल किताब के बारे में बताते हैं, “बारबालाओं के जीवन की कुछ कठोर व मर्मभेदी सच्चाइयाँ हैं, जो कोई नहीं जानता. ये बारबालाएँ क्या करती हैं? कितने दिन इस रुपहले संसार में अँधियाला जीवन जीती हैं? वे कहाँ गुम हो जाती हैं? कैसा इनसान उनके अन्दर बसता है? इन बारबालाओं को कैसा पति, पिता, दोस्त, परिवार मिलता है?  ऐसी हर जानकारी इस किताब में आईने की तरह साफ दिखती है”.

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सुपरिचित पत्रकार विवेक अग्रवाल की यह किताब मुम्बई की बारबालाओं की जिन्दगी की अब तक अनकही दास्तान को तफसील से बयान करती है. यह किताब बारबालाओं की जिन्दगी की उन सच्चाइयों से परिचित कराती है जो निहायत तकलीफदेह हैं. बारबालाएँ अपने हुस्न और हुनर से दूसरों का मनोरंजन करती हैं. यह उनकी जाहिर दुनिया है, लेकिन शायद ही कोई जानता होगा कि दूर किसी शहर में मौजूद अपने परिवार से अपनी सच्चाई को लगातर छुपाती हुई वे उसकी हर जिम्मेदारी उठाती हैं.

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