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आहट में एक झोंका था..

किसी के इंतज़ार में शीशपाल खोये हुए हैं. उन्होंने उसकी 'आहट' को चित्रांकित किया है.

उनके आने की आहट से
खुद को देखा मैंने आइने में
मन दौड़ उठा पहले ही दरवाजे की ओर
मैंने भी शीघ्र दरवाजे पर फूल डाल दिये
और एक फूल चुन लिया गैसुओं के लिए.

चादरें बदल तकिया लगा दिया बिस्तर पर
और पानी लगा दिया मेज पर
मन बार-बार डोलता और भल लेता
दौड़कर उन्हें बाहों में
जबकि वे अभी आये न थे
मुझे बेसब्री से था उनका इंतजार
मगर सचेत कर दिया था मुझे उनकी आहट ने.

आहट में एक झोंका था हवा का
आहट थी किसी की? कौन था? हवा का झोंका था.

खुला छोड़ा था उनके लिए अपना द्वार
मन की एक भूख एक प्यास
बुझाने की एक बेला में
मेरा सनम मेरा प्यार मेरा यार
मगर वह तो रह गयी है अभी अधूरी
क्योंकि वह कहीं दिखाई नहीं देती दरवाजे की ओर
आहट में एक झोंका था हवा का
वे नहीं थे उस आहट में
फिसल गया था मन हवा के एक झोंके में
उनके लिए एक आहट से।

-शीशपाल.


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