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कहकहे वाले काका हाथरसी

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18 सितम्बर 1906 को उत्तर प्रदेश के हाथरस में काका का जन्म हुआ था तथा निधन भी इसी तारीख को 89 वर्ष की आयु में 1995 में हुआ.

उनका असली नाम प्रभुनाथ गर्ग था.

काका हाथरसी ने एक नाटक में 'काका' का चरित्र निभाया था जो उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने अपने नाम में इसे अपनाया. हाथरस में रहने के कारण वे काका हाथरसी बन गए.

काका हाथरसी अपनी व्यंग्य रचनाओं के लिए मशहूर हैं.

वे जितने कुशल रचनाकार थे उतने ही अच्छे संगीत के जानकार भी. वे चित्रकारी भी करते थे और
स्टेज पर नाटक भी करने का उन्हें शौक था.

1935 में काका ने 'संगीत' नामक पत्रिका भी शुरू की.

1985 में काका को पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

काव्य में योगदान के लिये 'काका हाथरसी पुरस्कार' तथा संगीत के क्षेत्र में कार्य करने वालों को 'काका हाथरसी संगीत' सम्मान दिया जाता है.

काका हाथरसी के प्रमुख काव्य-संग्रह :
काका के कहकहे.
काका तरंग.
काका की फुलझड़ियां.
काका के प्रहसन.    
जय बोलो बेईमान की.
यार सप्तक.    
काका के चुटकुले.

-समय पत्रिका.  

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